नीलकंठ अब विलुप्त होने के कगार पर

विषपान करने और उसे पचा लेने के लिए ही शिव का नाम नीलकंठ पड़ा था, और नीलकंठ पक्षी का नाम भी इसके कुछ इसी तरह के चरित्र के कारण रखा गया होगा