लव, सैक्स और धोखा !

सुबह-सुबह पार्कों में चाहे अलग-अलग गेट से ‘एंटर’ हों परंतु इन सबका ‘टारगेट’ एक ही होता है,मजे लेकर बातें करना। ऊपर लिखे शीर्षक के पहले दो हिस्से तो इनकी जिंदगी में से निकल चुके होते हैं और ‘धोखा’ शब्द आते ही इनके कान खड़े हो जाते हैं क्योंकि अपनी प्रॉपर्टी बच्चों के नाम लिखकर ये भी धोखा खाए होते हैं। इनके हिस्से में बस पार्कों की ये हंसी ठिठौली ही बची होती है।