स्वतंत्रता: हमारा शाश्वत अधिकार

जब जब स्वतंत्रता का दुरुपयोग समाज के भीतर अव्यवस्था पैदा करता है , तब तब सर्वोच्च सर्वशक्तिमान का सर्वोच्च न्याय ,मानवता की सहमति से या उसके बिना, पुनः संतुलन हासिल करने का प्रयास करता है. !